रोज़ -ब- रोज़
हिंदी कविता
बुधवार, जुलाई 21, 2010
किस्मत
सुबह सूरज
साया बनेगा
क्या कभी
चांद शाम ढलने के साथ
बरसाने लगेगा प्रचंडता
शायद कभी नहीं
सच है
किस्मत में सबके
सब कुछ नहीं
1 टिप्पणी:
Vineet Dubey
मंगलवार, जुलाई 27, 2010 5:08:00 am
सच है
किस्मत में सबके
सब कुछ नहीं
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