गुरुवार, जुलाई 15, 2010

कोंपल

मासूम खिलखिलाहट
नन्ही सी खिलखिलाहट

आहट
मुस्कुराते कल की आहट
मुखड़ा
नहीं दुखड़ा दमकता मुखड़ा
सुबह
सूरज की रोशनी पर सवार सुबह
तरंग
आकाश में फैले रंगों की तरंग
मासूम खिलखिलाहट
नन्ही सी खिलखिलाहट

रैना
गोदी में अम्मा के सोती रैना
सपने
सुरों से सजे उमड़ते-घुमड़ते सपने
कारवां
मिट्टी में सने सब एक से दोस्तों का कारवां
रास्ता
मंजिल की फिक्र किए बगैर भागता रास्ता
मासूम खिलखिलाहट
नन्ही सी खिलखिलाहट

पानी
निष्छल नदियों में कलकल पानी
हवा
आवारा बादलों को साथ ले घूमती हवा
सितारे
अमावस को रोशन करने दमकते सितारे
धरती
रंग-बिरंगे फूलों से महकती धरती
मासूम खिलखिलाहट
नन्ही सी खिलखिलाहट

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत ही सुंदर आपने बताया नहीं कि पिटारे में और क्‍या क्‍या छिपाए रखा है. संगीत के बारे में न तो बताया, और इस कविता को पढकर तो आपसे नाराजी मोल लेने का मन कर रहा है. भला ऐसा भी कहीं होता कि आप सारा पिटारा छिपाए बैठे..

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  2. वाह बहुत ही सुंदर आपने बताया नहीं कि पिटारे में और क्‍या क्‍या छिपाए रखा है. संगीत के बारे में न तो बताया, और इस कविता को पढकर तो आपसे नाराजी मोल लेने का मन कर रहा है. भला ऐसा भी कहीं होता कि आप सारा पिटारा छिपाए बैठे..

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