शुक्रवार, जुलाई 02, 2010

स्वर्ग

दूर पहाड़ पर खड़े हो
तराई में फैली हरियाली को
नीले फैले आसमान को
देखिए
कहीं दूर जंगल में से आती
याकि सागर की ऊंची लहरों से
छनकर आती
ठंडी बयार को
महसूस कीजिए भीतर तक
डूबते सूरज को
और पानी में उसके प्रतिबिंब को
विदा कीजिए
स्वागत कीजिए अंधकार में
आंखें खोलते चांद का
स्वर्ग ढूंढना नहीं होता
होता है स्वर्ग
हर पल धरती पर

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